समज़मे आई? बात? वर्ना मंझी हुई कैदी नं २०१ है और

१
मुझेना उनकी भाषा नहीं बोलनी
तो ना तो ना…
: हांः …लेकिन क्या….
:ओय लेकिन क्या??….?
में चुप्पहि बैठी

२
थाल मे मौत सजाके देदी
और मैंने लेली
अब बैठी हूँ सजी मौत खा
सजी थाली पर नाचती।

३
ेय में कोई अन्न पूर्णा देवी नहीं हूँ समझी
चिर के रख दूंगी
समज्मेँ आई? बात?

५
मेरा मक़बरा

६
मंझी हुई कैदी नं २०१

७
ऐसी कैसी ये कविताएं?
पाषाण भूमि चिर फैल गयीं?!

८
इसको मार डाला
उसकी शादी करवा दी
इसको मारा उसकी शादी करवा डाली
चल अपना दिन खतम

९
इत्ते पेहे किस बातसे लेते है ए लोग?

१०
कभी सब स्टांडर्ड नौकर
कभी डाउन मार्केट चाकर

११
हाँ मै एक ाडियल टट्टू

Twenty Twenty-Five

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